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02.22.2008
 
गंधाती सड़क
रचना सिंह

एक गंधाती सड़क से पूछा
दूसरी गंधाती सड़क ने
क्या बात हैं हम क्यों इतना गंधाती हैं
ये गंध ना डीजल की है, ना पट्रोल की
फिर कहाँ से आती है
जवाब दिया दूसरी सड़क ने
अरी बावरी अभी यहाँ से
एक जो गया हैं
अपना परिचय वह
यहाँ सार्वजनिक कर गया है
इस गंध को सालों से हर
सड़क झेल रही है
पता नहीं और कब तक झेलेगी
सबके घरों में हैं
एक सुलभ शौचालय
फिर भी सडकों पर
इनका आना जाना
लगा ही रहता
और सड़कें गंधाती रहती है

सड़क = वेश्या


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