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02.22.2008
 
एक संवाद
रचना सिंह

अनैतिकता बोली नैतिकता से
क्यों इतना इतराती हो
मेरे प्रेमी के साथ रहती हो
और पति है वह तुम्हारा
बार बार मुझे ही समझाती हो
कभी मेरी तरह अकेले रह कर देखो
अपने सब काम खुद करके देखो
पुरुष को प्यार सिर्फ और सिर्फ
उसके प्यार के लिए कर के देखो
सामाजिक सुरक्षा कवच
पुरुष को तुम बनाती हो
समाज में अनैतिकता तो
तुम भी फैलाती हो
फिर बार बार
नैतिकता का पाठ
मुझे ही क्यों पढ़ाती हो ??


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