अनसुनी कर दो हर वह दस्तक़
जो दिल के दरवाज़ों पर होती है
आज कल का वक़्त सही नहीं है
ना जाने कब कौन अजनबी
एक दस्तक़ दे और फिर
चला जाये तुम्हारे जज़्बातों की
गठरी को समेट कर
बाद में ढूँढना बहुत मुश्किल होगा
क्योंकी जो दिल मे बसते हैं
उनकी तस्वीर कैसे किसी को दिखाओगे
और उन्हें चोर कैसे कह पाओगे
अच्छा होगा
अनसुनी कर दो हर वह दस्तक़
जो दिल के दरवाजों पर होती