दुआ रचना श्रीवास्तव
सूखे से तरसी आँखों ने माँगी दुआ वर्षा की पानी बरसा और बरसता ही चला गया सब कुछ बहा गया कुछ यूँ कबूल होती है दुआ गरीबों की