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11.29.2008
 

दुआ
रचना श्रीवास्तव


सूखे से तरसी आँखों ने
माँगी दुआ वर्षा की
पानी बरसा और बरसता ही चला गया
सब कुछ बहा गया
कुछ यूँ कबूल होती है
दुआ गरीबों की


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