बटवारा रचना श्रीवास्तव
घर, धन, वृद्ध आश्रम के खर्चे यहाँ तक कि कुत्ते भी बँटे पर पिता के त्याग, प्यार माँ के आँसू, दूध और पीड़ा का कुछ मोल न लगा क्योंकि पुरानी, घिसी चीज़ों का कुछ मोल नहीं होता