रचना श्रीवास्तव


कविता

अपनों के बीच भी कहाँ...
दोहरा जीवन जीते हैं हम
नूतन वर्ष
प्यार को जो देख पाते
प्रेम बाहर पलेगा
माँ की कुछ छोटी कवितायें
मैं कुछ कहना चाहती हूँ
ये कैसी होली है

बाल-साहित्य

प्यारी दुनिया
मुझे फेरी गॉड मदर नहीं बनना
मुझे माँ के पास सोना है हलवा

कहानी

भरोसा