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ISSN 2292-9754

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01.13.2016

 

भूख और मौत
रचना गौड़ ’भारती‘


भरा हो पेट तो संसार जगमगाता है

लगी हो भूख तो ईमान डगमगाता है

संसार में कौन बड़ा इसका द्वन्द्व तो देवताओं में भी चला है और आखिर में गणेशजी को सर्वप्रथम याद करने का आशीर्वाद मिला। एक बार इसी तरह भूख और मौत भी अपना दम्भ भरने लगी। मौत ने भूख से इतरा कर कहा- देख मैं सबसे बड़ी हूँ एक बार आ जाऊँ प्राणी दुनिया में नहीं रह सकता। मैं अजेय हूँ, पराजेता हूँ अतः बड़ी में हूँ। 

भूख बोली – मौत तू तो एक बार आती है मगर मैं तो हर रोज आती हूँ लोग मुझे खिला पिलाकर सम्मान के साथ विदा करते हैं। अगले दिन में पुनः आ जाती हूँ अतः मैं बड़ी।

मौत इस बात को मानना नहीं चाहती थी और अपनी बात पर अड़ी रही। भूख ने उसे फिर समझाना चाहा कि – देखो तुम्हारा तो अंत है जिसपर तुम अभी इतरा रहीं थीं लेकिन मैं अनन्त हूँ। मेरा कभी अंत नहीं। ये बात सुनते ही मौत अपने दम्भ पर शरमा गई और उसे समझ आ गया कि दम्भ करने से कोई बात नहीं होती,  बड़ा वही है जो अपने आगे दूसरे को कुछ समझे।


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