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| 07.01.2008 |
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अक्सर इन्सान गिरगिट बन जाते हैं
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अक्सर इन्सान गिरगिट बन जाते हैं मौज़ों को साहिल से जोड़कर फिर ग़मज़दाओं को ग़महीन बनाने के लिए कुर्सी के लिए चूसकर रक्त का क़तरा-क़तरा रखते हैं गिद्ध दृष्टि दूसरों की बहू-बेटियों पर मुद्दतों से ख़तो-क़िताबत करने वाले |
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