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12.09.2007
 
यूँ पवन, रुत को रंगीं बनाये
आर.पी. शर्मा ’महरिष’

यूँ पवन, रुत को रंगीं बनाये
ऊदी-ऊदी घटा लेके आये

भीगा-भीगा-सा ये आज मौसम
गीत-ग़ज़लों की बरसात लाये

ख़ूब से क्यों न फिर ख़ूबतर हो
जब ग़ज़ल चाँदनी में नहाये

दिल में मिलने की बेताबियाँ हों
फ़ासला ये करिश्मा दिखाये

साज़े-दिल बजके कहता है ‘महरिष’
ज़िंदगी रक़्स में डूब जाये

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