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12.09.2007

 
परिचय  
 
नाम :

आर.पी. शर्मा महरिष

 

श्री आर.पी. शर्मा का जन्म ७ मार्च १९२२ ई को गोंडा में (उ.प्र.) में हुआ। शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त श्री शर्मा जी का उपनाम "महरिष" है और आप मुंबई में निवास करते हैं। अपने जीवन-सफर के ८५ वर्ष पूर्ण कर चुके श्री शर्मा जी की साहित्यिक रुचि आज भी निरंतर बनी हुई है। ग़ज़ल रचना के प्रति आप की सिखाने की वृति माननीय है। विचारों में स्फूर्ति व ताज़गी बनी हुई है, जिसका प्रभाव आपकी ग़ज़लों में बखूबी देखा जा सकता है, तथा विचारों की यह ताज़गी आप की रोज़मर्रा की जिंदगी को भी संचालित करती रहती है। ग़ज़ल संसार में वे "पिंगलाचार्य" की उपाधि से सम्मानित हुए हैं

आपकी प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार हैं

  1. हिंदी गज़ल संरचना-एक परिचय (सन् १९८४ में मेरे द्वारा इल्मे- अरूज़ - उर्दू छंद-शास्त्र) का सर्व प्रथम हिंदी में रूपांतर

  2. गज़ल-निर्देशिका

  3. गज़ल-विधा

  4. गज़ल-लेखन कला

  5. व्यहवारिक छंद-शास्त्र (पिंगल और इल्मे- अरूज़ के तुलनात्मक विश्लेषण सहित),

  6. नागफनियों ने सजाईं महफिलें (ग़ज़ल-संग्रह)

  7. गज़ल और गज़ल की तकनीक।
    उनकी आने वाली पुस्तक है "मेरी नज़र में" जिसमें उनके द्वारा लिखी गईँ अनेक प्रस्तावनाएँ, समीक्षाएँ रहेंगी जो उन्होंने अनेक लेखकों, कवियों और ग़ज़लकारों पर लिखीं हैं और वो अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैँ।

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