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10.11.2007
 
वो तनहाई वो गलबंहियाँ
आर.पी. घायल


वो तनहाई वो गलबंहियाँ मेरे गीतों में ढलती हैं
तेरी उल्फ़त की धुपछंहियाँ मेरे गीतों में ढलती हैं

जो लम्हे आज तक गुज़रे हैं तेरे संग ख़ुशियों में
उन्हीं लम्हों की ये ख़ुशियाँ मेरे गीतों में ढलती हैं

मेरी में साँसों शामिल है जो तेरी याद की ख़ुशबू
उसी ख़ुशबू की ये डलियाँ मेरे गीतों में ढलती हैं

तेरी आँखों में खिलते हैं वफ़ा के फूल हर लम्हा
उन्हीं फूलों की पंखुड़ियाँ मेरे गीतों में ढलती हैं

तुझी को देखकर 'घायल' महक उठता है ये मधुवन
इसी मधुवन की मंजरियाँ मेरे गीतों में ढलती हैं


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