एकात्म के लिए प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी
अधर चुप रहते हैं आँखें खुली पर मौन।
आत्मा साधती है - अलौकिक आत्म-संवाद पर से एकात्म के लिए
सम्पूर्ण देह पृथ्वी की तरह सृष्टी करती है - प्रकृति का, प्रकृति में, प्रेम का अनश्वर और अहर्निश।