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| 06.12.2009 |
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पहली घटना-
-मगर
पिताजी। आपकी देखभाल कौन करेगा?
वैसे भी
दोस्त की बहिन की शादी है। मैं ही चला जाता हूँ।
-अरे
बेटा। हम इतने भी बूढ़े नहीं हुए कि देखभाल की जरूरत पड़े। तू बहू को ले जा।
माँ ने कहा।
-
मैं अनपढ़,
गँवार और बदसूरत हूँ ना इसलिए नहीं ले जाते। शर्म महसूस होती है। पत्नी ने
मन ही मन कहा।
दूसरी घटना-
-
अरे बेटा।
बहू को ले जाकर क्या करेगा?
दोस्त के भाई की ही शादी है। तू ही चला जा।
-मगर
पिताजी।
-बेटा,
घर
में भी बहुत काम रहता है। फिर आजकल तेरे पिताजी की तबीयत भी ठीक नहीं रहती।
तू ही चला जा। माँ ने कहा।
-
माँ,
तुम तो जानती हो। इस समय बसों-ट्रेनों में कितनी भीड़ होती है। डेढ़-दो
घण्टे क्यू में लगो तो टिकट मिलता है। और इस भीषण गर्मी में डेढ़-दो
घण्टे..!
-तो
इसमें बहू क्या करेगी?
पिताजी संयत स्वर में खीझते हुए बोले।
-लेडिज़
क्यू में...। |
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