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06.03.2012


तुम और मैं

तुम किसी शुतुरमुर्ग़ की तरह
लम्बे-लम्बे डग भरते
दौड़े चले जाते हो

और मैं चींटियों से सने केंचुएँ की भाँति
रेंगता चला आता हूँ, तुम्हारे पीछे-पीछे

तुम ऊँचे नभ में
किसी गिद्ध की तरह तैरते हो
पर फैलाए,
सारी दुनिया पर नज़र गड़ाए

और मैं अँधे कुएँ में
किसी चमगादड़ की तरह
दीवारों पर पंख फड़फड़ाता रहता हूँ

तुम खून से सने दाँत दिखाते
दहाड़ते हुए
बस्तियों से गुज़रते हो

और मैं टाँगों में दुम दबाए
किसी गीदड़ की भाँति
खिसियाता हुआ
तुम्हारे पीछे-पीछे चला आता हूँ

तुम किसी ग्वाले की तरह
काँधे पर लाठी लिए
जूतियाँ चरमराते हुए
आगे-आगे चले जाते हो

और मैं भेड़ों के रेवड़ की तरह
तुम्हारी किलकारी सुनकर
उछलता चला आता हूँ

तुम किसी वहशी की तरह
मेरे बदन से
एक-इक कपड़ा खींचकर
मुझे नंगा किए जाते हो

और मैं किसी नपुसंक की भाँति
तुम्हारी हरकतों पर
तालियाँ पीट-पीट कर हँसता रहता हूँ


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