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05.22.2009
 

सुख-दुःख में जो साथ चले हैं
पुरु मालव


सुख-दुःख में जो साथ चले हैं
मीत यहाँ ऐसे विरले हैं

देखो नफ़रत की आतिश में
जाने कितने ख़्वाब जले हैं

और रखे क्या सामां पथ में
लेकर तेरी याद चले हैं

क्या लेना हमको बरसों से
पल में जी कर लौट चले है

धूप खिली है ’पुरू’ ख़ुशियों की
ग़म के बादल लौट चले हैं


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