अब साथ भी उनका रहे या न रहे पुरु मालव
अब साथ भी उनका रहे या न रहे चलना है मुझे वो चले या न चले पूछो अभी उससे बहारों का पता यूँ रू-ब-रू फिर वो रहे या न रहे तुम आज जी भर के सीसकने दो मुझे कल क्या पता ये ग़म रहे या न रहे हम तो कहेंगे जो भी कहना हैं हम उसकी है मरज़ी वो सुने या न सुने मुझे मेरी बस राह आ जाए नज़र ये रात चाहे फिर ढले या न ढले है ज़िंदगी का अर्थ ही चलना 'पुरु' राह मिल गई मंज़िल मिले या न मिले