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ISSN 2292-9754

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05.18.2017


ज़िन्दगी

स्वेटर बुनने
और उधेड़ने की
कशमश जैसी है
जिंदगी!!
एक पल में इधर तो
एक पल में उधर;
गंगा गये तो गंगाराम,
यमुना गये तो यमुना दास!!
कितना पिसते हैं हम
दोराहों की चक्की में
कभी औरों के अधीन तो
कभी ख़ुद के अधीन !!
असमंजस की पीर,
बेचैनी, छटपटाहट
पिंजरे में क़ैद
पंछी की बौखलाहट जैसी
मन को कभी उद्विग्न तो
कभी शांत कर देती!!
वक्त की गाड़ी
निकलते ही दुविधा चक्र
अपनी तीव्र रफ्तार से
हो हल्ला मचा देता
रह जाता हाथ मलता
रोगों का शिकार
क्षीणकाय जर्जर मन!!


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