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ISSN 2292-9754

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05.18.2017


स्वप्न आग़ोश
(हाइकु कविता)

सर्द हवाए~म
जादू सी सुरमुई
हुई आहट!!

मन किवाड़
झटके से कौंधता
मदहोशी में!!

सलौनी यादें
झोंकों में लिपट के
छुये बदन!!

जादू झपकी
भूलते सुध-बुधि
स्वप्न आग़ोश!!


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