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ISSN 2292-9754

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08.27.2016


तुम और मैं

तुम सूरज
मैं छाँव और बादल
मुझे छिपाने की आदत है

तुम भूधर
मैं सरिता और सागर
मुझे बहने की आदत है

तुम नीलाम्बर
मैं काली घटा घनघोर
मुझे बरसने की आदत है

तुम चमन
मैं कली और सुमन
मुझे खिलने की आदत है

तुम पानी
मैं नमक और चीनी
मुझे घुलने की आदत है

तुम हक़ीक़त
मैं नींद और करवटें
मुझे ख़्वाबों की आदत है

तुम मौन
मैं हँसी और ख़ुशी
मुझे खिलखिलाने की आदत है

तुम आईना
मैं कुमकुम और गहना
मुझे सँवरने की आदत है

तुम प्यार
मैं इक़रार और इनकार
मुझे इतराने की आदत है

तुम जीवन
मैं श्वास और प्राण
मुझे तुझमें जीने की आदत है


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