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ब्रिटेन में शिल्पा शेट्टी पर होने वाली कथित नस्लवादी टिप्पणी की
गूँज
लोकसभा से लेकर हाउस ऑफ कामंस तक सुनाई दी। इसे न्यूज चैनलों का असर कहें
या खबरों का अभाव राजधानी के एक प्रतिष्ठत दैनिक में संपादक की इवनिंग
मीटिंग में तय हो गया कि शिल्पा को अगर लीड नहीं ते कम फ्रंट पेज पर तो
जरूर लेना है। पहले यह खबर अंदर के किसी पेज पर सिंगल कॉलम जा रही थी,
जिसे किसी ट्रेनी ने बनाया था। मेन डेस्क पर न्यूज़
एडिटर ने वह कॉपी सीनियर सब एडिटर क्रांति सिंह को थमाते हुए कहा,
इसमें कुछ और इनपुट
जोड़कर
डीसी बनाइए फ्रंट पेज पर जाएगी। कॉपी एडिट करते समय क्रांति चिल्लाया ये
खबर किसने बनाई है। मैंने बताया सरल ने। वही नया लड़का?
हाँ,
लेकिन वह तो सात बजे चला गया। क्या हुआ?
मैंने
पूछा।
क्रांति सबको सुनाते हुए बोला,
नस्लवादी को नश्लवादी लिखा है। ठहाका लगा। पीपी ने दावा करते हुए कहा जरूर
बिहारी होगा। बृजबिहारी को छोड़कर
सभी
हँसे।
उनसे प्रतिवाद किया,
यार तुम भी तो पहले रोड को रोड़
लिखते थे। स्कूटर को तो अब भी सकूटर कहते हो। फिर क्या था,
डेस्क पर नुक्ताचीनी से लबरेज एक वाकयुद्ध् छिड़
गया। शोरगुल सुनकर न्यूज एडिटर केबिन से बाहर आए और चिल्लाए- यार दफ्तर है
या चमार सियारों का मुहल्ला। सब शांत होकर अपने-अपने काम में लग गए।
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