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06.16.2007
 
नस्लवाद
प्रमोद राय

ब्रिटेन में शिल्पा शेट्टी पर होने वाली कथित नस्लवादी टिप्पणी की गूँज लोकसभा से लेकर हाउस ऑफ कामंस तक सुनाई दी। इसे न्यूज चैनलों का असर कहें या खबरों का अभाव राजधानी के एक प्रतिष्ठत दैनिक में संपादक की इवनिंग मीटिंग में तय हो गया कि शिल्पा को अगर लीड नहीं ते कम फ्रंट पेज पर तो जरूर लेना है। पहले यह खबर अंदर के किसी पेज पर सिंगल कॉलम जा रही थी, जिसे किसी ट्रेनी ने बनाया था। मेन डेस्क पर न्यू एडिटर ने वह कॉपी सीनियर सब एडिटर क्रांति सिंह को थमाते हुए कहा, इसमें कुछ और इनपुट जोड़कर डीसी बनाइए फ्रंट पेज पर जाएगी। कॉपी एडिट करते समय क्रांति चिल्लाया ये खबर किसने बनाई है। मैंने बताया सरल ने। वही नया लका?  हाँ, लेकिन वह तो सात बजे चला गया। क्या हुआ? मैंने पूछा।

क्रांति सबको सुनाते हुए बोला, नस्लवादी को नश्लवादी लिखा है। ठहाका लगा। पीपी ने दावा करते हुए कहा जरूर बिहारी होगा। बृजबिहारी को छोकर सभी हँसे। उनसे प्रतिवाद किया, यार तुम भी तो पहले रोड को रो लिखते थे। स्कूटर को तो अब भी सकूटर कहते हो। फिर क्या था, डेस्क पर नुक्ताचीनी से लबरेज एक वाकयुद्ध् छि गया। शोरगुल सुनकर न्यूज एडिटर केबिन से बाहर आए और चिल्लाए- यार दफ्तर है या चमार सियारों का मुहल्ला। सब शांत होकर अपने-अपने काम में लग गए।


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