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05.31.2012


होली

ये मौसम सुहाना
होली का बहाना
हमें प्यार है उड़ाना
पहल कर दिखाना।

ये रंगी हवाएँ
फूलों को झुलाएँ
हमें पास बुलाएँ
लेतीं हमारी बलाएँ

ये मस्ती का भाव
सबको खेलने का चाव
ना ओ किसी को ताव
रहे सबका यही ख्वाब।

ना हो कोई उदास
जीवन में निराश
मिलन की हो आस
सब आएँ पास-पास।

रंग चढ़े मनपर
ना हो कभी कमतर
चाहे ना चढ़े तनपर
पर हो फुहार सब पर।

कोई घर ना बचे
कोई शहर ना रहे
कोई भी ना छूटे
कोई दिल ना टूटे

दिल दिल से मिलें
वैर के पते झड़ें
द्वष्थ दूर हम करें
रंग राग के भरें।

रंग ऐसा लगे
कि सब रंगमय लगे
कुछ ना अलग दिखे
सब पहचान ही मिटे।

सब जाति के रंग
सब धर्मों के रंग
घोलकर प्यार के रंग में
मल दो हरेक के मन में

ना रहे कोई भी अलग ढंग में।
रहे मस्त होली के हुड़दंग में
रंग जाएँ मानवता के रंग में।


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