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02.01.2008
 
डूबते सूरज का इश्क : पुस्तक परिचय
डॉ. प्रेम जनमेजय

पुस्तक : डूबते सूरज का इश्क

लेखक : प्रेम जनमेजय

प्रकाशक : डायमंड बुक्स

संपर्क   : premjanmejai@gmail.com

ऑन लाईन खरीदने के लिये : www.dpb.in

मूल्य : रु. ७५/-

 

डूबते सूरज का इश्क डॉ. प्रेम जनमेजय का नया व्यंग्य संकलन है। इस पुस्तक में ३१ व्य़ंग्य कथाएँ संकलित की गई हैं। इन व्यंग्य कथाओं में एक ताज़गी है और अपने आसपास के जीवन को बेहतर करने की और समझने की लेखकीय आकांक्षा है।

व्यंग्य को एक गंभीर कर्म मानने वाले प्रेम जनमेजय आधुनिक व्यंग्य की अपनी पीढ़ी के सशक्त व्यंग्यकार हैं। पिछले चौंतीस वर्षों से साहित्य रचना में सृजनरत इस रचनाकार ने हिंदी व्यंग्य को सही दिशा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परंपरागत विषयों से अलग हटकर प्रेम जनमेजय ने समाज में व्याप्त आर्थिक विसंगतियों तथा सांस्कृतिक बुराइयों को चित्रित किया है। इनका व्यंग्य अपनी मारक क्षमता के कारण दिशायुक्त प्रहार तो करता ही है साथ ही सोचने को बाध्य भी कर देता है। प्रेम जनमेजय की रचनाओं में एक सजग नागरिक के साथ-साथ एक मौलिक सर्जक के दर्शन सहज ही हो जाते हैं। व्यवस्था पर प्रखर व्यंग्य तो प्रेम जनमेजय की रचनाओं में हैं ही, किंतु देश की आर्थिक नीतियों का वास्तविक अर्थ समझना प्रेम जनमेजय की अपनी विशेषता है। इनकी व्यंग्य कथाओं में ताजगी के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी खूबसूरती से उकेरा गया है। जिसे पढ़कर पाठक को लेखक स्वयं के अंदर ही प्रतीत होता है।

लगभग चार वर्ष तक वेस्टइंडीज विश्वविद्यालय में अतिथी आचार्यके रूप में, हिंदी भाषा और साहित्य में सार्थक काम करने के बाद वे अपने व्यापक अनुभवों के साथ भारत लौटे।

आजकल प्रेम जनमेजय व्यंग्य की एक महत्त्वपूर्ण पत्रिका ’व्यंग्य यात्रा’ का संपादन एवं प्रकाशन कर रहे हैं।



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