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03.15.2008
 

तेजेंद्र शर्मा की कहानियाँ आपका रिश्ता एक दर्द से जोड़ देती हैं....... 

डॉ. प्रेम जनमेजय


बेघर आंखें          कहानी संग्रह

प्रकाशन वर्ष        2007

प्रकाशक           अरु पब्लिकेशन्स प्रा. लि.

                  (सरस्वती हाउस समूह), दरिया गंज,

                  नई दिल्ली-110002

पृष्ठ संख्या          168

कीमत             रू.200/-  मात्र

 

 तेजेंद्र शर्मा की कहानियों को पढ़ना आसान नहीं है। ये कहानियाँ आपका रिश्ता एक ऐसे दर्द से जोड़ देती हैं जो आपकी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाता है। ऐसे में तेजेंद्र की कहानी कहानी नहीं रह जाती है, वह अपनी रचनात्मकता के साथ आपके रगो¬-रेशे में बस जाती है। दर्द से रिश्ता आसान नहीं है पर ये तो ऐसा दर्द है जो करुण रस का सुख देता है, जो जीवन को एक व्यापक सोच देता है और एक विशाल फलक पर मानवीय मूल्यों से साक्षात्कार कराता है।

तेजेंद्र की कहानियाँ आपको सीमित नहीं करती हैं और न ही एक बंधे बंधाए परिवेश को दोहराती हैं अपितु एक नयेपन के साथ जीवन के सौंदर्य को साक्षात करती हैं। उनका यह नया संग्रह उसी कड़ी क़ा एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरहद पार के हमारे रिश्ते अबूझ¬ सी पहेली बने हुए हैं। उनमें कोई स्पष्टता नहीं दिखाई देती है। ऐसे बहुत कम लेखक हैं जिन्होंने उस परिवेश की सच्चाई को समझने और उसे रचनात्मक प्रस्तुति देने का साहस किया है। तेजेंद्र ने सरहद पार मुसलिम परिवेश में जी रहे नगमा जैसे चरित्रों (एक बार फिर होली) को हिंदी साहित्य का हिस्सा बनाया है जिसने उस मौत को गले लगाया है जिसमें इंसान का शरीर तो नहीं मरता लेकिन आत्मा अनेक मौतें मर जाती है। जो आज भी, छलनी हुई उस आत्मा को अपने उस शरीर में ढो रही है जिसमें अपने उपर चढ़ाए गए कपड़ों को उठाने की ताकत नहीं। पर इस छलनी हुई आत्मा के साथ वह इंसानों को दायरे में बाँटने वाली उस संकुचित मानसिकता से संघर्ष करती है जो इंसानियत की आत्मा को छलनी करने में लगे हुए हैं।

तेजेंद्र में एक विशिष्ट कलात्मकता है जो जीवन के यथार्थ को कटु नहीं होने देती। वह जीवन की सच्चाई को अभिव्यक्त करते हुए रचनात्मकता एवं कलात्मकता का एक संतुलन बनाए रखते हैं।  उनकी यही खूबी कहानी को समाप्त करने से पहले पाठक को अपने वर्तमान में लौटने नहीं देती है। और अपने वर्तमान में लौटने के बावजूद उनकी कहानियों का पाठक तेजेंद्र की कहानियों के कथा परिवेश से स्वयं को मुक्त नहीं कर पाता है। उनकी कहानियों की यही ताकत विभिन्न भाषाओं में अनूदित होने के बावजूद अपनी प्रभावामता को कम नहीं होने देती है . उनका कहानी संग्रह बेघर आंखें हिंदी कथा-साहित्य की नई खिड़कियाँ खोलेगा और कहानी की दुनिया में एक बेहतर ट्रेंड को स्थापित करेगा।


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