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10.22.2007

 
परिचय :  
 
नाम : डॉ. प्रेम जनमेजय
 

18 मार्च, 1949 को इलाहाबाद (उ.प्र.) में जन्मे, डॉ. प्रेम जनमेजय दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ़ वोकेशनल स्टडीज़ के हिन्दी विभाग में रीडर के पद पर कार्यरत हैं।

व्यंग्य को एक गंभीर कर्म तथा सुशिक्षित मस्तिष्क के प्रयोजन की विधा मानने वाले प्रेम जनमेजय आधुनिक व्यंग्य की तीसरी पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैं। पिछले चौंतीस वर्ष से साहित्य रचना में सृजनरत इस रचनाकार ने हिंदी व्यंग्य को सही दिशा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परम्परागत विषयों से अलग हटकर प्रेम जनमजेय ने समाज में व्याप्त आर्थिक विसंगतियों तथा सांस्कृतिक प्रदूषण को चित्रित किया है। इनकी व्यंग्य भाषा की प्रखरता तथा नवीन सादृश्य विधान की आलोचकों ने विशेष रूप से प्रशंसा की है। लगभग चार वर्ष तक वेस्ट इंडीज़ विश्वविद्यालय में अतिथि आचार्य के रूप में सार्थक काम करने के बाद वे अपने व्यापक अनुभवों के साथ लौटे हैं।

डॉ. प्रेम जनमेजय की अन्य कई संस्थाओं से सम्बद्धता रही है। त्रिनिडाड एवं टुबैगो के ओपन स्कूल के पाठ लेखन समिति के विषय विशेषज्ञ एवं सदस्य; गगनांचल (भारतीय सांस्कृतिक सम्बद्ध परिषद) के सहयोगी सम्पादक; इंडो रशियन लिटरेरी क्लब, रूसी सांस्कृतिक केंद्र (1995-1998) के महासचिव; उत्तर प्रदेश सरकार, महाराष्ट्र सरकार, माध्यम संस्थान (लखनऊ) तथा युवा साहित्य मंडल (गाज़ियाबाद) की पुरस्कार समिति के सदस्य; युवा साहित्य मंडल (गाज़ियाबाद) के सलाहकार इत्यादि।

डॉ. प्रेम जनमेजय ने मई, 2002 में त्रिनिडाड में आयोजित त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में आयोजन समिति से सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंदन, न्यू जर्सी, मिआमी, वेस्ट इंडीज़ और भारत में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में आलेख पाठ एवं चर्चाओं में भाग लेते रहे हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय तथा रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा आयोजित "पुनश्चर्या पाठ्‍यक्रम" में विभिन्न विषयों पर व्याख्यान और लखनऊ. चंडीगढ़, भोपाल, रायपुर, दुर्ग, हरदा, बरेली, राजमहेंद्री, जालंधर, बम्बई, बड़ौदा, कलकत्ता, जयपुर, उदयपुर, इलाहाबाद, इंदौर, गाजियाबाद, दिल्ली आदि नगरों की साहित्यक संस्थाओं द्वारा आयोजित साहित्य गोष्ठियों तथा सम्मेलनों की अध्यक्षता, उनमें रचना एवं आलेख पाठ आदि कर भाग लिया।

डॉ. प्रेम जनमेजय की प्रकाशित कृतियाँ इस प्रकार हैं:-

व्यंग्य संकलन:    राजधानी में गंवार, बेर्शमेव जयते, पुलिस! पुलिस!, मैं नहीं माखन खायो, आत्मा महाठगिनी, मेरी इक्यावन रचनाएँ, शर्म मुझको मगर क्यों आती।

बाल साहित्य:    शहद की चोरी, अगर ऐसा होता, नल्लुराम।

नव-साक्षरों के लिए:    खुदा का घड़ा,  हुड़क।

संपादन:    बीसंवी शताब्दी उत्कृष्ट साहित्य: व्यंग्य रचनाएँ। नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित हिंदी हास्य व्यंग्य संकलन का श्रीलाल शुक्ल से साथ संपादन। 

सम्मान एवं पुरस्कार:    हिन्दी निधि तथा भारतीय विद्या संस्थान (त्रिनिडाड एवं टुबैगो) द्वारा विशिष्ट सम्मान (2002); अवन्तिका सहस्त्राब्दी सम्मान (2001): हरिशंकर परसाई स्मृति पुरस्कार (1997); हिन्दी अकादमी साहित्यकार सम्मान (1997-98); अंतर्राष्ट्रीय बाल साहित्य दिवस पर इंडो रशियन लिट`रेरी क्लब सम्मान (1998); प्रकाशवीर शास्त्री सम्मान (1997); "माध्यम" युवा रचनाकार अट्‍टहास सम्मान (1991); युवा साहित्य मंडल सम्मान (1996); युवा साहित्य मंडल विशिष्ट सम्मान (1997)

सौजन्य सम्पादन:    गगनांचल में सम्पादन सहयोग। व्यंग्य विविधा का नरेंद्र कोहली विशेषांक तथा आलोचना विशेषांक, यू.एस.एम. पत्रिका का व्यंग्य विशेषांक, चंडीगढ़ केंद्रित अंक तथा अंतिम दशक का व्यंग्य अंक। सार्थक का सम्पादन, अतिमर्ष में सम्पादन सहयोग।

अन्य:    15 अगस्त 1998 को स्वतंत्रता की स्वर्ण जयन्ती समापन समारोह के आकाशवाणी से सीधे प्रसारण के कमेंटेटर। 15अगस्त, 1999 को त्रिनिडाड रेडियो से सीधे प्रसारित भारतीय स्वतंत्रतादिवस पर आयोजित कार्यक्रम के हिन्दी के एकमात्र कमेंटेटर। भारतवंशियों के महत्वपूर्ण योगदान पर आधारित रचना जहाजी चालीसा का त्रिनिडाड और टुबैगो के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री वासुदेव पांडेय द्वारा लोकापर्ण। अनेक रचनाओं का अंग्रेज़ी, पंजाबी, गुजराती तथा मराठी में अनुवाद।

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