जिन आँखों में सदा रौब देखा था मैंने,
उन आँखों में अब ख़ौफ़ देखता हूँ मैं ।
जिन आँखों में सदा प्यार देखा था मैंने,
उन आँखों में अब नफ़रत देखता हूँ मैं ।
जिन आँखों में सदा अपनापन देखा था मैंने,
उन आँखों में अब परायापन देखता हूँ मैं ।
आँख तो आँख न हो आईना हो गया है,
आँखों को क्या हुआ है या नज़र का धोखा है
आँख वक्त की सेहरा से रिश्ते बदलते देखता है ।