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05.31.2008
 

परेशान गिरगिट
प्रवीर कुमार वर्मा


गिरगिट परेशान है आदमी को देखकर
क्यों है वह बदनाम भला आदमी से पेशतर ।
रूप गुण बदलने वाले फनकार भी शर्मसार,
हम तो केवल मात्र रगंमंच के कलाकार !

आदमी अपनों में हो तो अपना ही जलवा दिखाता है ,
जब अपनों से दूर हो तो अपनों को मुँह चिढ़ाता है !
आदमी का है उसूल - मानों पानी का बुलबुला,
नाहक ’गिरगिट’ की बदनामी ने दिया है मुझे रुला!


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