मत कुरेदो ... बहुत कुछ होगा अनावृत ... बहुत कुछ ऐसा जो है अनपेक्षित... , असहनीय..., अशोभनीय ..., है मेरे भी भीतर क्योंकि मेरे पास भी है बहाना इंसान होने का ।।