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ISSN 2292-9754

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04.08.2018


मैं पास तुम दूर खड़ी

कैसे होगा मिलन हमारा
तुम सुबह मैं शाम सखी
कैसे होगा मिलन हमारा
तुम दिन मैं रात सखी
कैसे होगा मिलन हमारा
तुम जीत मैं हार सखी
कैसे होगा मिलन हमारा
तुम धूप मैं छाँव सखी
कैसे होगा मिलन हमारा
तुम ख़ास मैं आम सखी
कैसे होगा मिलन हमारा
नशा तुम्हारे ऊपर अब भी
जाम तुम्हारा खनक रहा
जामों को टकराकर तुम तो
मदहोश हुई सी जाती हो
मैं तो तुम से दूर खड़ी हूँ
देख तुम्हें मदमस्त हुई
साहस पाकर जाम उठाने
हाँथ बढ़ा यूँ पहुँच गयी
जाम अभी भी दूर पड़ा है
तुम भी मुझ से दूर खड़ी
मैं तो हूँ एक आम सखी री
तुम तो हो एक खास सखी
कैसे होगा मिलन हमारा
मैं पास तुम दूर खड़ी॥


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