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02.16.2009
 

बदलाव 
प्रताप नारायण सिंह


बचपन में सुनी थी एक कहानी
दादी माँ की जुबानी
बहुत समय पहले घने जंगलों में
दो पैरों वाले भयानक जीव रहा करते थे
लोग उन्हें राक्षस कहा करते थे
शरीर तो आदमी जैसा होता था
पर दाँत बड़े, बड़े नाखून और सर पर सींग होता था
जब कभी वे आदमी को पाते थे
मारकर खा जाते थे
मैंने सोचा कितना अच्छा है अब
राक्षस सारे मर गए
आदमी के दिलों से उनके डर गए
परन्तु
जब बड़ा हुआ तो पता चला
राक्षस मरे नहीं वे आदमी की शक्ल में बदल गए हैं
अब जंगल छोड़, नगर में आकर बस गए हैं।


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