प्रताप नारायण सिंह


कविता

अधूरा
अभिशप्त
अभ्युदय 
आस
जब तुम बरसे
तुम मेरी परछाई हो
पहेली
प्रतीक्षा
बदलाव
भ्रमित

दीवान

कब तक