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| 02.24.2008 |
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आपके जैसा प्यारा साथी |
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आपके जैसा प्यारा साथी कोई भला क्या खो सकता है
आप बुलाएँ हम ना आयें ऐसा कैसे हो सकता है भूल भूल-भुल्या की दुनिया मैं ऐसा भी तो हो सकता है पथ दिखलाने वाला ख़ुद ही हर रस्ते में खो सकता है गैरों पर शक करने वाले इस पर भी कुछ ग़ौर कभी कर अपने घर का ही कोई बन्दा मन का मन्दा हो सकता है यह मत समझो रोना धोना काम महज़ है नाज़ुक दिल का अपनी पीड़ा से घबरा कर पत्थर भी तो रो सकता है माना के आसान नही है दुख के बिस्तर पर कुछ सोना सुख के बिस्तर पर भी प्यारे कोई कितना सो सकता है "प्राण" ज़रूरत है जीवन मैं थोड़ी थोड़ी सच्चाई की तन का सुन्दर हर एक इन्सां मन का सुन्दर हो सकता |
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