अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
03.08.2008
 
तलाश
प्रकाश यादव निर्भीक

ग़म ख़ुशी मेँ बदल दे,
जीवन को सुधार दे,
हरएक मुझे प्यार करे,
उस महफ़िल की तलाश है!

मँझधार से उठा ले,
डूबने से मुझे बचा ले,
जीवन नैया पार करे,
उस साहिल की तलाश है!

शिक्षा में जो ईमान दे,
जीने की सीख शान दे,
मुफ़लिस के लिए जान दे,
उस इन्सान की तलाश है!

सजा दे चमन को,
महका दे आँगन को,
बना दे उपवन कानन को,
उस सुमन की तलाश है!

निराशा भरी ज़िन्दगी में,
आशा की एक किरण ले,
जीवन तम को दूर करे,
उस किरण की तलाश है!

साथ न छोड़े मरते दम,
न करे कभी प्यार कम,
खाये जो इसकी कसम,
उस हमदम की तलाश है!

जिससे होगी हसरत पूरी,
जो है अब बहुत ज़रुरी,
बिन जिसके जिन्दगी अधूरी,
उस सहचरी की तलाश है!

भर दे जो ज़ख़्मे जिग़र,
बनकर रहे हरदम निडर,
न रखे कभी ग़म का फ़िकर,
उस "निर्भीक" की तलाश है!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें