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| 05.22.2009 |
| एक ख़्वाब टूटा हुआ प्रकाश यादव निर्भीक |
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ज़ख़्म को मत इतना कुरेदो कोई
एक ही तो गुलाब था ज़िन्दगी में
अधूरी ख़्वाहिश रह गई तो क्या हुआ
दूर होकर भी हर वक़्त आसपास है वो
मजबूर थे हालात से हम दोनों इस क़दर |
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