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03.08.2008
 
दर्द दिल का
प्रकाश यादव निर्भीक

दर्द दिल का किसे बताऊँ,
कौन सुनेगा इस दुनियाँ में;
थोड़ा रोकर थोड़ा हँसकर,
दर्द पीता हूँ पल पल में।

सुननेवाला सुन हँसता है,
साथ न देता है यहाँ कोई;
कहाँ जाकर किसे बताऊँ;
मेरी तो किस्मत ही खोई।

प्यार किया तो नफरत पायी,
अब तक इस जहाँ में मैनें;
दुनियाँ वाले तो बेदर्दी हैँ,
दिल का दर्द वह क्या जाने।

सुबह हुआ तो सूरज मिला,
सूरज कहा शाम को कहना;
शाम हुई तो मिली पूनम,
पूनम बोली कुछ कहो मत जानम।

निराश हो निज धाम आया,
मिला यहाँ भी कोई नहीँ;
रातभर मुझे नीँद नहीँ आयी,
सुबह हुआ फिर दर्द वहीं।


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