दर्द दिल का किसे बताऊँ,
कौन सुनेगा इस दुनियाँ में;
थोड़ा रोकर थोड़ा हँसकर,
दर्द पीता हूँ पल पल में।
सुननेवाला सुन हँसता है,
साथ न देता है यहाँ कोई;
कहाँ जाकर किसे बताऊँ;
मेरी तो किस्मत ही खोई।
प्यार किया तो नफरत पायी,
अब तक इस जहाँ में मैनें;
दुनियाँ वाले तो बेदर्दी हैँ,
दिल का दर्द वह क्या जाने।
सुबह हुआ तो सूरज मिला,
सूरज कहा शाम को कहना;
शाम हुई तो मिली पूनम,
पूनम बोली कुछ कहो मत जानम।
निराश हो निज धाम आया,
मिला यहाँ भी कोई नहीँ;
रातभर मुझे नीँद नहीँ आयी,
सुबह हुआ फिर दर्द वहीं।