कुछ पलों का संग पुलकित किया अंग अंग तेरे साँसों की सुगन्ध उड़ गया मैं अनंग ले स्पर्श की उमंग उन भौरौं के संग जो बसंती बयारों में फूलों के ईर्द गिर्द मँडराते हैं खुद को बेकाबू कर कुछ पाने की तमन्ना में निर्भीक अनुभूति लेकर