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| 04.06.2008 |
| अधूरा मिलन प्रकाश यादव निर्भीक |
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यह मनोहर हसीन शाम,
रवि रुक सा गया थककर,
उधर सज सँवर कर आ रही,
मगर आयी साथ लेकर,
यों |
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