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ISSN 2292-9754

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05.01.2016


सोच रहा हूँ

सोच रहा हूँ,इस गर्मी में,
चन्दा मामा के घर जाऊँ।
मामा मामी नाना नानी,
सबको कम्प्यूटर सिखलाऊँ।

सोच रहा हूँ पंख खरीदूँ,
उन्हें लगाकर नभ में जाऊँ।
ज़्यादा ताप नहीं फैलाना।
सूरज को समझाकर आऊँ।

सोच रहा हूँ मिलूँ पवन से,
शीतल रहो उन्हें समझाऊँ~।
ज़्यादा ऊधम ठीक नहीँ है,
उसे नीति का पाठ पढ़ाऊँ।

सोच रहा हूँ रूप तितलियों,
का धरकर मैं वन में जाऊँ।
फूल-फूल का मधु चूसकर,
ब्रेक फास्ट के मज़े उड़ाऊँ।

सोच रहा हूँ कोयल बनकर,
बैठ डाल पर बीन बजाऊँ।
कितने लोग दुखी बेचारे,
उनका मन हर्षित करवाऊँ।

सोच रहा हूँ चें-चें चूँ-चूँ,
वाली गौरैया बन जाऊँ।
दादी ने डाले हैं दाने,
चुगकर उन्हें नमन कर आऊँ।


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