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03.15.2014


रोटी बोली सब्जी बोली

बहुत भीड़ थी। आखिर पैसे वालों के यहाँ विवाह का कार्यक्रम था। खूब पैसे वाले ऐसे कामों में खूब बहाते हैं पानी कि तरह। यहाँ भी यही हाल था। सेठ चालना राम के बेटे विमल‌ का विवाह था। चारों तरफ जगर मगर बिजली की चका चौंध, लुप झुप करतीं रंग बिरंगी सोने चाँदी नीलम जैसी लड़ियाँ और टेबिलों पर सजे लजीज़ खाने। मक्के की रोटी सरसों का साग, बाजरे की पूड़ी, काजू की सब्जी और न जाने कितनी तरह की मिठाइयाँ, चाट पकोड़ी, पिज़्ज़ा, बर्गर खाने का सारा बा्ज़ार हाज़िर। कितना खाओगे भाई। अँगुली चाटते रह जाओगे, टेबिलें तो यही संदेशा दे रहीं थीं।

नवीन भी आमंत्रित था इस कार्यक्रम में। विमल का छोटा भाई ईश्वर नवीन का मित्र था, इस नाते ईश्वर ने कई मित्रों के साथ नवीन को भी बुलवाया था। बारात लगने के बाद लोग खाने पर टूट पड़े थे। प्लेट भर-भर के खाने का सामान लेकर खड़े-खड़े खाने का लुत्फ उठाने का अलग ही मज़ा है। नवीन ने भी यही सोचकर कि भीड़ में कौन बार-बार खाना लेने टेबिल तक जाये बहुत सारा खाना भर लिया था। लोग अपनी-अपनी मित्र मंडलियों के साथ खाने आनंद ले रहे थे। नवीन भी जुट गया। अपनी खुराक से कई गुना खाना प्लेट में था। कितना खाता। आधे से ज़्यादा प्लेट में ही रह गया। वह बचे हुये खाने के साथ प्लेट कचरा टोकनी में फेकने जा ही रहा था कि प्लेट की रोटी उछलने लगी,सब्जी ने भी कूदना चालू कर दिया।

सब्जी बोली, रोटी बोली मुझे व्यर्थ क्यों फेक रहे हो कितने लोग पड़े भूखे, क्यों नहीं ठीक से देख रहे हो।

नवीन घबरा गया। हाथ जहाँ के तहाँ रुक गये। सच में कितना सारा खाना वह फ़ेंकने जा रहा है। परंतु अब क्या हो सकता था। खाना तो फ़ेंकना ही था। वह थोड़ा आगे बढ़ गया वहाँ भीड़ कुछ कम थी। दूसरी टोकनी में वह धीरे से प्लेट रखने लगा।

तभी चावल उछल-उछल कर बोला "ये तुम क्या करते हो बेटे, इतना मँहगा चावल हूँ मैं मुझे जा रहे हो तुम फ़ेंके।"

अब तो नवीन डर गया, बोला, "मुझे माफ कर दो भैया, आगे से ऐसी गलती नहीं होगी।" वह प्लेट रखने लगा।

तभी अचानक ज़ोरों से चिल्लाई दाल, "तुम भी करते अज़ब कमाल, बिना दाल के कितने बच्चे बिलख रहे भूखे बेहाल।"

नवीन थर-थर काँपने लगा पूरा कुनबे ने ही चढ़ाई का दी थी। हे राम यह क्या हो रहा है, उसका दिमाग शून्य होने लगा। बात तो सच थी, जब इतना खाना खा लेना संभव नहीं था तो क्यों लिया। कान पकड़कर वह बार-बार क्षमा माँगने लगा।

फिर से डरते डरते उसने प्लेट टोकनी की तरफ बढ़ाई कि प्याज, टमाटर, गाजर बोली, चिल्लाई रो पड़ी सलाद, "अगर कहीं अब मुझको फ़ेंका तुमको कर दूँगी बरबाद।"

नवीन प्लेट लेकर खाली कुर्सी पर बैठ गया। चिल्लाकर बोला, "अब मैं क्या करूँ गलती तो हुई है। आगे से फिर नहीं होगी। हे अन्न देवता मैं तुम्हारे पैर पड़ता हूँ एक बार तो विश्वास करो।"

"प्याज टमाटर के संग रोटी कितने बच्चे खाते हैं, ज़रा देश की हालत देखो करो गरीबों से संवाद।" सलाद अभी भी चीख रही थी।

नवीन दौड़ कर बाहर भागा, प्लेट की रोटियां वहाँ बैठे भिखारी को दे दीं और चावल, सलाद कुत्ते के सामने डाल दी और बिना पानी पिये ही घर आ गया। ठंड के दिनों में भी उसके माथे पर पसीना छूट रहा था।


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