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ISSN 2292-9754

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06.13.2016


रस भरे आम

 रस भरे आम कितने मीठे।
पत्तों के नीचे लटके हैं।
आँखों में कैसे खटके हैं.
इन चिकने सुंदर आमों पर,
पीले रंग कैसे चटके हैं।
सब आने जाने वालों का,
यह पेड़ ध्यान बरबस खींचे।
रस भरे आम कितने मीठे।

मिल जाएँ आम यह बहुत कठिन।
पहरे का लठ बोले ठन-ठन।
रखवाला मूँछों वाला है,
मारेगा डंडे दस गिन-गिन।
सपने में ही हम चूस रहे,
बस खड़े खड़े आँखें मीचे।
रस भरे आम कितने मीठे।

पापा के ठाठ निराले थे।
बचपन के दिन दिलवाले थे।
उन दिनों पके आमों पर तो,
यूँ कभी न लगते ताले थे।
ख़ुद बाग़वान ही भर देते,
थे उनके आमों से खींसे।
रस भरे आम कितने मीठे।


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