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02.26.2014


पत्र

अब नहीं है
इस पेड़ पर
पंछियों का बसेरा
साँप बनाकर ले गया है
उन्हें कोई आस्तीनों का सपेरा
और पता दे गया है
बाँबियों का
यह कह कर कि
मौके बेमौके
पत्र ज़रूर लिखना।
या उजाले की जयंती।


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