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ISSN 2292-9754

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02.03.2018


हमने मज़े उड़ाये

लगी हुई थी हम बच्चों को,
बहुत दिनों से आस।
दादा दादी की शादी के,
होंगे साल पचास।

स्वर्ण जयंती जल्दी होगी,
हम सोचें मुस्काएँ।
कब दादा को दूल्हा दादी,
जी को दुल्हन बनायें।

और शीघ्र ही प्यारा~-प्यारा,
सा शुभ दिन वह आया।
दादा दादी को जब हमने,
नख शिख पूर्ण सजाया।

कुरता चमक रहा दादा का,
दादी जी की साड़ी।
दोनों की जोड़ी है सचमुच,
सबसे प्यारी न्यारी।

धूम धड़ाका हो हल्ला कर,
हमने मज़े उड़ाये।
मित्र सभी हम सब बच्चों के
दावत खाने आये।


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