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ISSN 2292-9754

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02.18.2017


दादीजी की दौड़

दादीजी ने कल दौड़ी थीं,
सौ मीटर की दौड़।

एक लाइन में खड़ी हुई थीं,
दस बूढ़ी महिलाएँ।
इंतज़ार था विहसिल बजे और,
कसकर दौड़ लगाएँ।
कौन आएगा अव्वल उनमें,
लगी हुई थी होड़।

विहसिल बजी तो सारे धावक,
पग सिर पर रख भागे।
सबने देखा मेरी दादी,
दौड़ रही थी आगे।
सभी दौड़ने वालों में थी,
वह सबसे बेजोड़।

दादी आई प्रथम दौड़ में,
उनको मिली बधाई।
और पुरस्कृत हुईं, दी गई,
उनको गरम रजाई।
कड़क ठण्ड में ओढ़ेंगे हम,
बच्चे बूढ़े प्रौढ़।


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