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ISSN 2292-9754

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10.15.2017


चित्र बना

चित्र बना रे चित्र बना,
कुछ बिरला कुछ घना- घना।

चित्र बना रे चित्र बना।

जिसमें ऊँचा पर्वत हो।
पर्वत पर बदल रत हो।
बादल जोरों से गरजे।
अर्रा कर पानी बरसे।
आंधी से बूढ़े खजूर का,
ज़ोर-ज़ोर से हिले तना।

चित्र बना रे....

फटर- फटर बज उठें किवाड़।
होनें लगें बंद सब द्वार।
बूढ़े छुपें रजाई में।
बच्चे भिड़ें पढाई में।
ले कर अम्मा आ जाएँ,
चाय कुरकुरे भुना चना।

चित्र बना रे......

बिजली कड़के ज़ोरों से।
खिड़की भड़के शोरों से।।
टूटी डाल झकोरों से।
आम झड़ गए बोरों से।
बीनें जितना बीन सकें,
कौन करेगा अभी मना।

चित्र बना रे चित्र बना।


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