प्रभुदयाल श्रीवास्तव

लघु कथा
अभी भी हैं ऐसे लोग
खुशी
ग़ज़ल ग़ज़ल में फ़र्क
जीवन का आनंद
पहली किश्त
बचत‌
भूल सूधार की लिये
सरकारी फंड‌
सही सोच
कविता
जयंती या पुण्य तिथि
पत्र
बदला
बाल-साहित्य
अंधियारे से डरना कैसा
अच्छे दिन
अब मत चला कुल्हाड़ी
अम्मा को अब भी है याद‌
अम्मू भाई
अम्मू भाई का छक्का
आई कुल्फी
आदत ज़रा सुधारो ना
आधी रात बीत गई
ईश्वर ने जो हमें दिया है
एक ज़रा सा बच्चा
औंदू बोला
कल के प्रश्न
कितने अच्छे अम्मा बाबू
कितने पेन गुमाते भैया
कुछ न कुछ करते रहना है
गधे से सस्ता
गप्पी
ग़लती नहीं करूँगी
गाय सलोनी
चलना है अबकी बेर तुम्हें
चलो पिताजी गाँव चलें हम
चाचा कहते
चिंगारी
चित्र बना
चूहे की सज़ा
जंगल की बात
जब दुर्गावती रण में निकलीं
जूता चोर चूहा
झब्बू का नया साल
झूठे मक्कारों को दंड
ट्रेफिक सिगनल‌
डेडू
थाने का कारकून
दादी का जन्म दिवस
दादीजी की दौड़
दादीजी के बोल
दाल बाटियों के दिन
दीपक बनकर‌
नदी ताल भर जाने दो
नर्मदा में नौका विहार
नुस्खे सीखो दादी से
पर्यावरण बचाओ
प्रकृति की मौलिकता
बादल भैया ता-ता थैया
बिल्ली
बिल्ली की दुआएँ
भैया मुझको पाठ पढ़ा दो
भैयाजी को अच्छी लगती
मछली है रंगीन‌
मेरी नींद नहीं खुल पाती
मुट्ठी में है लाल गुलाल
मुन्नी बोली ही ही ही ही
योगाभ्यास
रस भरे आम
राम कटोरे
रामू काका का बैल
रूठी बिन्नू
रोटी बोली सब्जी बोली
वन्स मोर
सभी पेश आते इज़्ज़त से
सूरज चाचा
सूरज भैया
सोच रहा हूँ
हमने मज़े उड़ाये
हमारी माँ अगर होती
हाथी दादा पूजे जाते
हिसाब किताब‌
होगी पेपर लेस पढ़ाई
नाटक (बाल साहित्य)
चलो सँभल के...
बस्तों की फरियाद‌
बाल कहानी
टीना ने चोरी पकड़वाई
राजा के बड़े-बड़े कान
आप-बी्ती / संस्मरण
पानी के भीतर की वो गुट्ट-गुट्ट