| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 11.13.2008 |
|
रिमझिम, रिमझिम |
|
रिमझिम, रिमझिम,
झम-झम, झम-झम, देखो बरस रहा है पानी, भीग रहे हैं पेड़ व पौधे, भीग रहा नदी का पानी, भीग रहे हैं खेत-खलिहान, भीग रहे मेरे नाना-नानी। चलो कागज की नाव बनाएँ, वर्षा-जल में इसे तैराएँ, बारिश का आनन्द उठाएँ, बचपन अपना सफल बनाएँ। |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|