प्रभाकर पाण्डेय


कविता

ब्राह्मण
सभ्यता की पहचान

आलेख

विराम-चिह्न की आत्मकथा
आदमी (अनेकार्थता)
हिन्दी में लिंग-विचार
हिन्दी में नई एकपदीय क्रियाएँ : भोजपुरी के परिपेक्ष्य में
हिन्दी: वाक्य-विन्यास पद्धति और विभक्ति

बाल-साहित्य

कछुआ हारा, खरगोश जीता
चंदा मामा, चंदा मामा
चूहे लाल
रिमझिम, रिमझिम

लोक-साहित्य : भोजपुरी लोककथा

चावल बन गया धान
जैसे को तैसा
बड़ा कौन - लक्ष्मी या सरस्वती
देनेवाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के
करत-करत अभ्यास ते
सच्चा सोनार

संस्मरण

मानवता मर गई है या ....

ई-पुस्तक

माँ मन्थरा