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| 02.10.2008 |
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हिन्दी में लिंग-विचार
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लिंग-
लिंग वह लक्षण है जिससे यह लक्षित होता है कि कोई
'शब्द-संकल्पना'
नर है
या मादा। या यूँ कहें- किसी शब्द के स्त्री (मादा) या पुरुष (नर)
जाति-भाव का बोध करानेवाला रूप-लक्षण ही लिंग है।
'लिंग'
शब्द
की प्रकृति को स्त्री या पुरुष जाति के आधार पर निर्दिष्ट करता है।
जैसे-
पुत्र,
बेटा
लिंग के नर वर्ग के हैं तो पुत्री,
बेटी
लिंग के मादा वर्ग के।
हिन्दी में दो लिंग माने गए हैं- पुल्लिंग और स्त्रीलिंग।
क्या
हिन्दी में दो ही लिंग हैं
?
आइए,
विचार
करें-
१.
लड़का (पुल्लिंग) आ रहा है।
२.
लड़की (स्त्रीलिंग) आ रही है।
३.
नेताजी (पुल्लिंग) आ रहे हैं।
४.
नेताजी (स्त्रीलिंग) आ रही हैं।
ध्यान
दें,
"नेताजी
(स्त्रीलिंग) आ रही हैं।" यहाँ कहने के लिए कहा जा सकता है कि कोई
महिला नेता मायावतीजी,
ममताजी आदि होंगी;
इसलिए
"नेताजी (स्त्रीलिंग) आ रही हैं।" का प्रयोग हुआ है यानि प्रसंग,
वाक्यार्थ आदि के आधार पर लिंग-निर्धारण हुआ है।
जी
हाँ,
मेरा
भी तो यही कहना है कि प्रसंग,
वाक्यार्थ,
शब्द-प्रयोग,
वाक्य-प्रयोग आदि के आधार पर ही लिंग का निर्धारण होता है। जनता
जनार्दन ही प्रयोग द्वारा शब्दों के लिंग का निर्धारण करती है।
जैसे-
डाक्टर आए हैं /डाक्टर आई हैं।
आइए
गहराई से मंथन करें-
अगर
हम हिन्दी का एक शब्द
'पीठ'
लें
तो बिना वाक्य-प्रयोग के हमें कैसे पता चलेगा कि यह पुंलिंग है या
स्त्रीलिंग,
लेकिन
अगर वाक्य-प्रयोग करें,
जैसे-
५.
"मेरी पीठ में दर्द है।" तो यहाँ
'पीठ'
स्त्रीलिंग है जो संस्कृत के पृष्ठ का तद्भव है।
दूसरा
उदाहरण देखें-
६.
"विद्या का पीठ।" ७.
"मैहर में बहुत बड़ा शक्ति पीठ है।" तो यहाँ
'पीठ'
पुंलिंग है जो तत्सम है।
यहाँ
उत्पत्ति के आधार पर
'पीठ'
दो
अलग-अलग शब्द हैं और वाक्य-प्रयोग के आधार पर इनके लिंग का निर्धारण हो
रहा है।
उपरोक्त विवेचन के आधार पर हिन्दी में पुंलिंग,
स्त्रीलिंग के साथ ही साथ एक और लिंग है या एक और लिंग की गुंजाइश है;
जो है
उभय लिंग। इस वर्ग में विशेषकर बहुत सारे पदसूचक और जातिसूचक शब्द
सम्मिलित हो सकते हैं;
बस
विचार की आवश्यकता है।
आइए,
हिन्दी में कुछ और उभय लिंगी शब्दों को देखें-
१.
दही खट्टी है / दही खट्टा है। (प्रयोगाधारित)
२.
बड़ा प्याज / बड़ी प्याज।
३.
चाय ठंडा / ठंडी है।
४.
मंत्रीजी आ रहे हैं / आ रही हैं। ।। आप भी विचार करें ।। |
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