बड़े हौले से उसने आज मेरा हाथ छोड़ा है पारुल
बड़े हौले से उसने आज मेरा हाथ छोड़ा है कि बरसों बाद मुझको आज मेरे साथ छोड़ा है। नहीं परखा कभी पहले तो अब ये आज़माइश क्या मुझे मेरी ही नज़रों में क्यों गुनाहगार छोड़ा है। मेरी चाहत इबादत पे उन्हे शक़ था उन्हे शक़ है जला कर रूह तक मेरी मुझे बीमार छोड़ा है। अजब सी बेख़्याली थी कि हम दीवाने हो बैठे जगा कर ख़्वाब से हमको बड़ा लाचार छोड़ा है । बड़े हौले से उसने आज मेरा हाथ छोड़ा है………