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08.25.2007
 
अधूरे सपने
पाराशर गौड़

1

गोपी भारत में इन्जीनियर था और मधु एक ट्रेण्ड टीचर। उनका  अपना एक छोटा सा परिवार था। जिसमें एक माँ थी एक भाई और भाभी। गोपी की अभी अभी नई नई शादी हुई थी। वहाँ वे अच्छा खा पी रहे थे। दोस्तों के कहने पर गोपी ने कैनेडा आने के लिए आवेदन पत्र भेजा। कुछ दिनों के बाद उसे एम्बेसी का पत्र मिला जिसमें उसके पत्र पर गौर करते हुए कैनेडा सरकार ने उन दोनों को वहाँ जाने व रहने की अनुमति दे दी थी।

परिवार में गोपी व मधु के विदेश जाने की खबर से खुशी का माहौल बना हुआ था। तैयारियाँ बड़ी जोरों-शोरों पर हो रही थीं। बधाईयाँ देने वालो का तांता लगा हुआ था कि अचानक माँ की तबियत खराब हो गई। उसे हस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत दिनों-दिन बिगड़ती जा रही थी। उनके कैनेडा आने से दो सप्ताह पूर्व गोपी की माँ चल बसी थी। रह गया था बड़ा भाई और भाभी। यहाँ आने के ठीक एक साल बाद भाई का पहला लड़का हुआ जिसका नाम उन्होनें आनंद रखा। प्यार से वे उसे बिटु कह कर पुकारते थे। दो साल बाद एक और बच्चा हुआ टिंकू।

जब से गोपी और मधु कैनेडा आये। यहाँ आने के बाद अपने पाँव जमाने के लिए उन्हें क्या-क्या पापड़ नहीं बेलने पड़े। अच्छी डिग्रियों के होते हुये भी उन्होंने काम के नाम पर फैक्ट्रियों व एजन्सियों के धक्के खाये। एक सस्ता सा बेसमेंट किराये में लेकर नंगे अखबारों में सोये। ट्रेनों बसों के धक्के खाये। सर्दियों में बर्फ में मीलों मील पैदल चले। जब-जब बर्फ की ठंडी हवा हाथ पाँवों की उँगलियों को सुन्न कर देती थी तब-तब वे अपने हिन्दोस्तान व वहाँ की गर्मियों को याद करते थकते नहीं थे। क्या-क्या नहीं किया और क्या क्या देखा। आपा-धापी की जिन्दगी से जूझते हुए गोपी और मधु ने कैनेडा में अपना जम-जमाव कर लिया था।

पिछले 20 सालों में रात दिन एक करके गोपी ने अपनी टेक्सी डाल ली थी। मधु बैंक में कलर्क लग गई थी।  दोनों ने मिलकर एक घर भी बना लिया था। इस दौरान उनके आँगन में एक सुदंर सी नन्ही बच्ची रोज़ी भी आ गई थी। ईश्वर की कृपा से अब उनके पास सब कुछ था जो उन्हें चाहिये था घर परिवार नौकरी और अपना काम। गोपी अपने परिवार के साथ बड़े अमन चैन के साथ रह रहा था।

सूरज ढलने लगा था। शाम के पाँच बजने वाले थे। रोज़ी स्कूल से और मधु काम से घर आ चुकी थी।

रोज़ी अपना होम वर्क करने के बाद मम्मी के कमरे से पुराने फोटो के एलबम उठा कर अपने कमरे में लाकर देखने लगी। देखते-देखते एक फोटो पर उसकी निगाहें टिक गईं। उसके बारे में जानने की उसकी जिज्ञासा जाग उठी कि ये है कौन?

एलबम को हाथों उठाये रोज़ी ने अपने कमरे से सीधे नीचे मम्मी के पास आकर पूछा- "मम्मी मम्मी देखो ये कौन है?"

फोटो को देखकर मधु बोली- "ये तेरे पापा है और कौन है।"

"हैं...!" आश्चर्य चकित होकर उसने कहा - "इतने हैंडसम थे पापा...!"

"हाँ...।"

"मम्मी मैं ये फोटो बड़ी कराने अपनी सहेली कैथलीन के यहाँ जा रही हूँ उसके पास स्कैनर है। इसे बड़ी बना कर मैं अपने कमरे में टाँगूँगी। मैं अभी आई।" कहते एलबम को वहीं छोड़ सीधे बाहर की ओर लपकी।

 

मधु ने ज्यों ही टेबल पर रखी एलबम को उठाया और देखने को हुई कि बाहर ड्राइव-वे में किसी गाड़ी की घर-घराहट सुनाई दी। लपक कर देखा तो गोपी था। बाहर आकर गोपी से बोली- "आप... आप  आज इतनी जल्दी ही घर आ गये। सब तो खैरियत तो है।"

"हाँ... सब ठीक है। कस्टमर जल्दी-जल्दी मिल गये थे। कमाई भी और दिनों की अपेक्षा आज ज्यादा हो गई तो सोचा हर रोज देर से जाता हूँ आज ज़रा जल्दी जाकर रोज़ी से बैठकर बात करूँ। बहुत दिनों से उससे मिलना ही नहीं हो पा रहा है। रोज़ी स्कूल से आ गई या नहीं ......।" हाथों में लटकते थैलों को किचन के पास रखते हुए उसने कहा।

"जी......, आ गई है। अभी वो अपनी सहेली कैथलीन के यहाँ गई है जल्दी आने को कह गई है।" कहते उसने चाय का प्याला गोपी के आगे रखते हुए कहा।

"कल उसका जन्म दिन है। रोज़ी कल 18 साल को पूरा कर 19 की हो जायेगी। उसने कल अपनी कुछ सहेलियों को इस मौके पर घर पर बुलाया है। आप ज़रा जल्दी आ जाना। मैं भी काम से लंच के बाद आ जाऊँगी।" इतना कह कर किचन में चली गई।

"18 साल...।"

18 साल कब गुजरे। कब रोज़ी इतनी बड़ी हो गई, गोपी को पता ही नहीं लगा। गोपी दीवार पर लगी रोज़ी की तस्वीर की ओर एकटक लगा कर उसे देखते रह गया।

"क्या देख रहे हो।" मधु ने उसकी तन्द्रा को भंग करते हुए कहा।

"देख रहा हूँ हमारी कल की नन्हीं सी गुड़िया आज देखते देखते कितनी बड़ी हो गई है।"

"समय बैठा थोड़ी रहता है किसीके लिए..." मधु ने कहा। इतने में रोज़ी आ धमकी। सीधे पापा से मुखातिब होकर कहने लगी - "पापा ये देखें ..." फोटो दिखाते हुए रोज़ी ने कहा- "पापा ...  आप इतने हैण्डसम थे...।"

"ये... अररे हैं भाई।" अपनी मम्मी से पूछो, "क्यों  मधु......?"

"मम्मी से क्या आप हम से पूछिए... आप  अभी भी हैन्डसम हैं।" रोज़ी ने कहा, "और हाँ डैडी कल हमारा जन्म दिन है जरा जल्दी आ जायेंगे तो हम पर बड़ी कृपा होगी।"

पलट कर मम्मी की ओर देखने लगी मानो कह रही हो... "क्यों मम्मी हम ठीक कह रहे है ना? क्योंकि पापा को तो हमारे होने न होने का कोई अहसास है ही नहीं। जब हम रात को सो जाते हैं तो आते हैं। और जब उठते हैं तो जा चुके होते है।"

"अररै! कैसे बात कर रही हो... कहो तो कल हम पूरे दिन घर पर ही रह जाएँ।" प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए गोपी ने कहा।

"नाट ए बैड आडिया...क्यों मम्मी ..?" कह कर रोज़ी सीधे ऊपर अपने कमरे में चली गई। वे दोनों किचन में कल की पार्टी के बारे में प्लान बनाने में जुट गये।

काम से लौटते समय मधु केक की दुकान पर रुक कर अपना ऑर्डर पिक करते हुए घर की ओर चल दी। रास्ते में रेडियो शैकपर नजर पड़ी तो एकाएक याद आया, स्कूल जाते समय रोज़ी ने कहा था, "मम्मी अबके बर्थ डे प्रेजेन्ट में मैं सी. डी. प्लेयर लूँगी ... हाँ।"

दुकान में घुसते ही वो शो केस में रखी चीजों को निहारते हुए सी.डी. की तलाश करने में लग गई|। तलाश करते करते उसे सी.डी. प्लेयर मिल ही गया।

    

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