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ISSN 2292-9754

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06.27.2016


ढूँढते रह जाओगे

रीछू रीछ ने मीकू खरगोश से कॉपी माँगी, "मीकू! मुझे अपनी गणित की कॉपी दे दो। मुझे अपनी कॉपी कंप्लीट करनी है।" रीछू ने कहा तो मीकू ने अपनी कॉपी तुरंत दे दी।

"मुझे यह कॉपी जल्दी चाहिए," मीकू ने कहा। "मुझे अगली प्रश्नावली के कुछ सवाल और करने हैं।"

"ठीक है। मैं तुम्हें कॉपी जल्दी लौटा दूँगा," रीछू ने लापरवाही से कॉपी लेते हुए कहा। मगर जैसा मीकू जानता था वैसा नहीं हुआ। रीछू ने मीकू की कॉपी समय पर वापस नहीं की। जब भी मीकू रीछू के यहाँ जाता, वह नहीं मिलता।

आखिर मीकू परेशान हो गया। वह विद्यालय में नया छात्र था। किसी को जानता था। उस की नयी-नयी दोस्ती चूंचूं चूहे से हुई थी।

मीकू ने चूंचूं से कहा, "यार चूंचूं! एक प्रॉब्लम है।"

"कहो भाई," चूंचूं ने इतराते हुए पूछा, "मेरे होते हुए तुम्हें क्या प्रॉब्लम हो सकती है?"

इस पर मीकू ने बताया, "मैं ने रीछू को अपनी गणित की कॉपी दी थी। उस ने आज तक नहीं लौटायी। जब भी घर पर कॉपी लेने जाता हूँ, वह घर पर नहीं मिलता है।"

तब बिना चौंके हुए चूंचूं ने कहा, "यह कौन सी नई बात है। यह तो रीछू की आदत है। वह आलसी है। आज का काम, कल पर टालता रहता है। इस तरह हर दिन सोचता है कि वह आज गणित की कॉपी कंप्लीट करेगा, मगर कर नहीं पाता है।

"इस तरह दिन पर दिन निकलते जाते हैं उस की कॉपी कंप्लीट नहीं होती है।"

यह सुनते ही मीकू निराश हो गया, "क्या अब मेरी कॉपी मुझे नहीं मिलेगी?"

तभी पास आते हुए चीकू ने कहा, "भाई ढूँढते रह जाओगे। मगर रीछू कभी समय पर घर नहीं मिलेगा।"

"क्या मतलब?" अब चौंकने की बारी मीकू की थी।

"यही कि अपनी कॉपी…," कहते हुए चीकू हँस दिया।

अब मीकू चीकू का मुँह देखने लगा। वह समझ गया कि रीछू ने उसे बेवकूफ़ बनाया है। उस की कॉपी अब हज़म हो गई है। वह उसे मिलने वाली नहीं है। फिर भी उस ने हिम्मत कर के पूछा, "तुम्हारा कहने का मतलब क्या है चीकू?"

"यही कि अब तुम्हें तुम्हारी कॉपी नहीं मिलनी है," कहते हुए चीकू अपने रास्ते चल दिया।

मगर, मीकू का मुँह देखने लायक़ था। उस ने चूंचूं से कहा, "यार चूंचूं, क्या वास्तव में मुझे अपनी कॉपी नहीं मिलेगी?"

"हाँ यार," चूंचूं ने कहा। "रीछू की आदत ही ऐसी है। मगर, हमें उसे सबक सिखाना पड़ेगा।"

यह जवाब सुन की मीकू कुछ नहीं बोला।

कुछ सोचते हुए चूंचूं ने कहा, "अब तुम घर जाओ। मैं कुछ तरकीब लगाता हूँ। यदि मेरी तरकीब कामयाब रही तो तुम्हें अपनी कॉपी शीघ्र वापस मिल जाएगी।" कहते हुए वह रीछू के घर की ओर चल दिया।

रीछू घर पर था। वह चूंचूं को देख कर बोला, "भाई चूंचूं! आओ। आज इधर का रास्ता कैसे भूल गए?"

"बस यार, तुझ से काम था, इसलिए चला आया।" चूंचूं ने कहा तो रीछू हँसता हुआ बोला, "भाई, मुझ से मज़ाक कर रहे हो। एक होशियार छात्र का मुझ से काम पड़ सकता है; यह मैं सोच भी नहीं सकता हूँ।"

"हाँ यार, कभी-कभी मुझे भी काम पड़ जाता है," चूंचूं ने कहा। "मुझे तुम्हारी गणित की कॉपी चाहिए।"

"अरे भाई क्यों मज़ाक करते हो," रीछू ने कहा। "मेरी गणित की कॉपी, वह भी तुम्हें चाहिए? मुझे क्यों शरमिंदा करते हो," रीछू चकित था।

"हाँ यार," चूंचूं बोला। "मैं ने 2-3 दिन गणित का कार्य नहीं किया है, इसलिए पीछे रह गया हूँ। यदि मुझे तुम्हारी कॉपी मिल जाती तो मेरा अधूरा काम पूरा हो जाता?"

रीछू यह सुन कर प्रसन्न हुआ। चूंचूं जैसा होशियार छात्र उस के पास आया था। वह भी उस की गणित की कॉपी माँगने। यह उस के लिए ख़ुशी की बात थी। इसलिए रीछू प्रसन्न हुआ। उस ने अपना बस्ता उठाया। गणित की कॉपी निकाली, चूंचूं को दे दी।

चूंचूं ने कॉपी देखी। उसे उलटा-पुलटा। नाम पढ़ा। अपने बस्ते में रख ली।

तभी रीछू ने कहा, "मुझे यह कॉपी कल लौटा देना। कल गणित के शिक्षक कॉपी जाँचेंगे," रीछू ने चूंचूं को चेताया।

"हाँ क्यों नहीं," चूंचूं ने बोला। "मुझे मालूम है। गणित के शिक्षक बड़े ख़तरनाक है। कॉपी कंप्लीट न हो तो बहुत मारते हैं," कहते हुए चूंचूं चल दिया। "तुम्हें कल चार बजे कॉपी मिल जाएगी।"

रीछू के मज़े थे। वह दूसरे दिन चार बजे कॉपी का इंतज़ार करने लगा। मगर, चूंचूं नहीं आया। जब रीछू इंतज़ार कर के थक गया तो उस ने चूंचू को फ़ोन किया। उधर से जवाब आया, "मैं अभी कॉपी ले कर आता हूँ।"

रीछू बहुत देर तक इंतज़ार करता रहा। मगर, चूंचूं कॉपी ले कर नहीं आया।

रीछू से रहा नहीं गया। उसे गणित की कॉपी चाहिए थी। उस ने इंतज़ार करना ठीक नहीं समझा। वह उठा। चूंचूं के घर की ओर चल दिया।

इधर चूंचूं ने सोचा कि चलो, रीछू को ज़्यादा परेशान करना ठीक नहीं है। उस की कॉपी घर चल कर दे देनी चाहिए। इसी में अपनी भलाई है। यह सोच कर वह रीछू के घर की ओर चल दिया।

जैसे ही रीछू चूंचूं के घर पहुँचा उस की माँ ने कहा, "चूंचूं तो तुम्हारे घर गया है।"

यही बात चूंचूं को रीछू की माँ ने कही, "चूंचूं! रीछू तो तुम्हारे घर कॉपी लेने गया।"

"ठीक है आंटीजी, मैं अपने घर जाता हूँ।" इधर रीछू ने चूंचूं की माँ को कहा और उधर चूंचूं ने रीछू को माँ को कहा और दोनों अपने-अपने घर की ओर चल दिए।

इधर रीछू अपने घर पहुँच कर चूंचूं का इंतज़ार करने लगा। उधर चूंचूं रीछू का घर आने का इंतज़ार करने लगा। मगर, कोई किसी के घर नहीं आया।

रीछू ने पुनः चूंचूं को फ़ोन लगाया। वह ग़ुस्से में था। एक पिद्दी-सा चूहा उसे परेशान करे। यह वह कैसे बरदाश्त कर सकता था, इसलिए अकड़ कर बोला, "चूंचूं! तूने मुझे क्या समझ रखा है?" वह ग़ुस्से में चिल्लाया।

"अरे भाई क्या हुआ?" चूंचूं ने उधर से जवाब दिया, "मैं तो तुम्हें कॉपी देने आया था, मगर तुम मुझे घर पर नहीं मिलें।"

"अपने आप को ज़्यादा होशियार समझता है, मुझे बेवकूफ़ बनाता है," रीछू ग़ुस्से में बोल रहा था। "मुझे जानता नहीं है। एक थप्पड़ दूँगा तो साले की हड्डी-पसली तोड़ दूँगा।

"मुझे 5 मिनट में अपनी कॉपी चाहिए, नहीं तो समझ लेना तेरी ख़ैर नहीं," कहते हुए रीछू ने फ़ोन पटक दिया। वह पहली बार अपनी ग़लती पर पछता रहा था। उसे नहीं मालूम था कि जब कोई बेवकूफ़ बनाता है तो कैसा ग़ुस्सा आता है?

इधर चूंचूं ने यह सुना तो वह तुरंत रीछू के घर की ओर चल दिया। मगर, इस बार चूंचूं धरती के नीचे के रास्ते चल रहा था। उसे शंका थी कि कहीं रीछू उसे रास्तें में न मिल जाए। वरना वह ग़ुस्से में उसे मार डालेगा।

इधर रीछू चूंचूं को ऊपर के रास्ते ढूँढते हुए चूंचूं के घर की ओर चल रहा था। उसे अपनी ग़लती का अहसास हो गया था। उस ने क़सम खा ली थी कि वह आइंदा मेहनत करेगा। गणित की कॉपी मिलने पर उस के सारे सवाल उतार लेगा। फिर गणित की कॉपी मीकू को लौटा देगा।

इधर चूंचूं परेशान था। वह रीछू के ग़ुस्से को जानता था। वह ग़ुस्से में हर किसी का पटक-पटक कर मारता है। इसलिए वह रीछू से बचना चाहता था।

कहते हैं कि तब से रीछू और चूंचूं एक-दूसरे को ढूँढ रहे है। रीछू चूंचूं से माफ़ी माँगना चाहता है।

इधर चूंचूं रीछू के ग़ुस्से से बचने के लिए धरती के अंदर के रास्ते पर भाग रहा है। तब से आज तक वे कभी एक-दूसरे से नहीं मिले।

यही वजह है कि तब से रीछू ने किसी को बेवकूफ़ नहीं बनाया है।


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